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किशमिश के प्रकार: काली, सुनहरी, हरी, मुनक्का और जंबो किशमिश में फर्क, स्वाद और उपयोग

किशमिश के प्रकार और उनके स्वाद, पोषण, कीमत और उपयोग का आसान तुलनात्मक गाइड।

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किशमिश के प्रकार | Meva Sagar Journal

बाज़ार में किशमिश के कई रूप मिलते हैं: काली, सुनहरी, हरी, जंबो और मुनक्का, और कीमतें भी अलग-अलग होती हैं। कई लोगों को समझ नहीं आता कि खीर में कौन-सी डालें, दलिए में कौन-सी और भिगोकर खाने के लिए कौन-सी बेहतर है। किशमिश के प्रकार की सही जानकारी आपको सही उपयोग के लिए सही किशमिश चुनने में मदद करती है। इस लेख में हम काली, सुनहरी, हरी और जंबो किशमिश तथा मुनक्का के बीच अंतर, उनके सूखने की प्रक्रिया, स्वाद, पोषण, कीमत और व्यावहारिक उपयोग समझाएँगे। साथ ही हम ताज़ा किशमिश की पहचान, भंडारण और मात्रा भी बताएँगे। जानकारी सामान्य मार्गदर्शन है, चिकित्सकीय सलाह नहीं।

संक्षिप्त उत्तर: काली किशमिश धूप में सुखाई गई, गहरी और मीठी होती है; सुनहरी किशमिश अंगूर को सल्फर उपचार या कृत्रिम सुखाने से बनती है और हल्की-फलदार होती है; हरी किशमिश छोटी और हल्की खट्टी-मीठी; जंबो किशमिश बड़ी और गूदेदार; और मुनक्का बीज वाली बड़ी किशमिश है, जो भिगोने और घरेलू उपायों में लोकप्रिय है। मिठाई-खीर में सुनहरी या काली, भिगोने के लिए काली या मुनक्का चुनिए।

किशमिश के प्रकार: काली गहरी मीठी, सुनहरी हल्की फलदार, हरी छोटी हल्की खट्टी मीठी, जंबो काली बड़ी गूदेदार, मुनक्का बीज वाली बड़ी
उपयोग के अनुसार किशमिश चुनिए।

किशमिश कैसे बनती है

किशमिश अंगूर को सुखाकर बनाई जाती है। धूप में पारंपरिक रूप से सुखाने पर अंगूर गहरे-काले हो जाते हैं, जबकि छाया या मशीन से सुखाने और कभी-कभी सल्फर डाइऑक्साइड उपचार से अंगूर हल्का सुनहरा रहता है। अंगूर की किस्म, सुखाने की विधि और आकार के अनुसार किशमिश का नाम और स्वाद बदल जाता है। पोषण की दृष्टि से सभी में फाइबर, पोटैशियम और प्राकृतिक शर्करा होती है। किशमिश के पोषण की जानकारी USDA FoodData Central पर देखी जा सकती है। विस्तृत तुलना के लिए किशमिश के प्रकारों की तुलना पढ़ें।

मुख्य प्रकारों की तुलना

प्रकाररूप और स्वादसबसे अच्छा उपयोग
काली बीज रहितगहरी, मीठी, चबाने में नरमदलिया, भिगोकर, रोज़ का
जंबो कालीबड़ी, गूदेदार, रसीलीमिठाई, सजावट, पुलाव
सुनहरीहल्की, फलदार, हल्की खट्टी-मीठीखीर, केक, सलाद
हरीछोटी, पतली, हल्की खट्टीपुलाव, चटनी, नाश्ता
मुनक्का (बीज वाली)बड़ी, गहरी, बीज के साथभिगोकर, घरेलू उपाय

मुनक्का के बारे में मुनक्का के फायदे और भीगी किशमिश के लाभ भीगी किशमिश के फायदे पढ़ें।

पोषण में अंतर

सभी किशमिश में लगभग 299 कैलोरी, 79 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 59 ग्राम शर्करा, 3.7 ग्राम फाइबर और लगभग 749 मिग्रा पोटैशियम प्रति 100 ग्राम होता है। रंग से पोषण में बड़ा अंतर नहीं आता, हालाँकि काली किशमिश में कुछ एंटीऑक्सिडेंट पॉलीफेनॉल अधिक माने जाते हैं। सुनहरी किशमिश में सल्फर डाइऑक्साइड हो सकता है, जो संवेदनशील लोगों के लिए प्रतिक्रिया का कारण बन सकता है; देखें सूखे फलों में सल्फर। आयरन के लिए आयरन के लिए ड्राई फ्रूट्स और NIH आयरन फैक्ट शीट देखें।

उपयोग के अनुसार चुनाव

  • दलिया, ओट्स और दही: काली किशमिश।
  • खीर, हलवा, लड्डू: सुनहरी या काली।
  • पुलाव, बिरयानी: हरी या सुनहरी, तली हुई।
  • भिगोकर खाना: काली किशमिश या मुनक्का।
  • केक, बेकिंग: सुनहरी या जंबो।
  • मसाला चाय या काढ़ा: मुनक्का।

रेसिपी के लिए ड्राई फ्रूट खीर और पंजीरी देखें।

ताज़ा किशमिश की पहचान

अच्छी किशमिश नरम, चबाने योग्य और चिपचिपी नहीं होती, उसका रंग एक-सा होता है, और उसमें खट्टी या किण्वित गंध नहीं होती। बहुत कड़ी, सूखी या चीनी की परत वाली किशमिश पुरानी या खराब भंडारण वाली हो सकती है। चीनी की परत जम जाना हानिकारक नहीं, पर यह पुरानी किशमिश का संकेत है। कीड़े और जाले की जाँच कीजिए। खुले बाज़ार की किशमिश को धोकर खाइए; देखें ड्राई फ्रूट्स धोकर कैसे खाएँ। भंडारण के लिए ड्राई फ्रूट्स का भंडारण पढ़ें।

सही मात्रा

अधिकांश वयस्कों के लिए रोज़ एक चम्मच किशमिश (लगभग 10 ग्राम या 8 से 10 दाने) पर्याप्त है, जो लगभग 30 कैलोरी देती है। डायबिटीज़ वाले लोग इसे नट्स के साथ और कम मात्रा में लें। वज़न घटाने वाले इसे मीठे की जगह इस्तेमाल करें। बच्चों को छोटे दाने गले में अटक सकते हैं, इसलिए उम्र के अनुसार सावधानी रखिए। सामान्य पोषण मार्गदर्शन के लिए राष्ट्रीय पोषण संस्थान देखें।

किशमिश खरीदने का सरल तरीका

यदि आप एक ही किशमिश लेना चाहें तो काली बीज रहित किशमिश सबसे बहुमुखी है: वह दलिए, खीर, लड्डू और भिगोने सभी में चल जाती है। विशेष स्वाद या सजावट के लिए सुनहरी या जंबो किशमिश अतिरिक्त रखिए। हर बार खुली किशमिश धोकर और फिर सुखाकर ही उपयोग कीजिए, और पैकेट को हवाबंद डिब्बे में रखिए।

ताज़ी किशमिश

काली, सुनहरी, हरी, जंबो किशमिश और मुनक्का मेवा सागर पर।

किशमिश देखें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किशमिश कितने प्रकार की होती है?

मुख्य रूप से किशमिश के प्रकार हैं: काली बीज रहित, जंबो काली, सुनहरी, हरी और मुनक्का (बीज वाली बड़ी किशमिश)। ये अंगूर की किस्म, सुखाने की विधि और आकार के अनुसार अलग होती हैं। काली किशमिश धूप में सूखकर गहरी और मीठी होती है; सुनहरी हल्की और फलदार; हरी छोटी और हल्की खट्टी; जंबो बड़ी और गूदेदार; मुनक्का बीज वाली बड़ी किस्म है। सभी में फाइबर और प्राकृतिक शर्करा होती है और उपयोग के अनुसार चुनाव किया जा सकता है।

काली और सुनहरी किशमिश में क्या फर्क है?

काली किशमिश अंगूर को धूप में पारंपरिक तरीके से सुखाने पर बनती है, इसलिए वह गहरी और मीठी होती है। सुनहरी किशमिश अक्सर छाया या मशीन से सुखाकर और कभी-कभी सल्फर डाइऑक्साइड उपचार से बनती है, इसलिए रंग हल्का और स्वाद फलदार, थोड़ा खट्टा-मीठा होता है। पोषण में अधिक अंतर नहीं है। सुनहरी किशमिश में सल्फर हो सकता है, जिससे संवेदनशील लोगों को प्रतिक्रिया हो सकती है। सल्फर से बचना हो तो काली किशमिश चुनिए। लेबल पढ़ना हमेशा सहायक रहता है।

मुनक्का और किशमिश में क्या अंतर है?

मुनक्का बड़े आकार की, बीज वाली, गहरी रंग की सूखी अंगूर होती है, जबकि आम किशमिश आमतौर पर छोटी और बीज रहित होती है। पारंपरिक रूप से मुनक्का को भिगोकर खाने और घरेलू नुस्खों, जैसे कब्ज़ और खाँसी के उपायों, में प्रयोग किया जाता है। पोषण में दोनों समान हैं; मुनक्का थोड़ी अधिक गूदेदार होती है और बीज निकालना पड़ता है। रोज़ के उपयोग के लिए बीज रहित काली किशमिश सुविधाजनक है, और भिगोने की परंपरा के लिए मुनक्का।

कौन-सी किशमिश खीर और मिठाई के लिए अच्छी है?

खीर, हलवे और मिठाइयों के लिए सुनहरी या काली किशमिश दोनों अच्छी हैं। सुनहरी किशमिश हल्का रंग और फलदार खटास देती है, जो दूध की मिठास को संतुलित करती है। काली किशमिश गहरी मिठास और रंग देती है। जंबो किशमिश सजावट के लिए सुंदर लगती है। इन्हें घी में हल्का भूनकर डालने से स्वाद निखरता है। चीनी की मात्रा किशमिश की मिठास के अनुसार घटाइए। छोटे बच्चों के लिए किशमिश को काटकर या पीसकर डालिए।

क्या किशमिश रोज़ खाना ठीक है?

हाँ, अधिकांश स्वस्थ लोगों के लिए रोज़ एक चम्मच (8 से 10 दाने) किशमिश खाना ठीक है। यह फाइबर, पोटैशियम और थोड़ा आयरन देती है। डायबिटीज़ वाले लोग इसकी चीनी का ध्यान रखें और इसे नट्स के साथ लें। अधिक खाने से दस्त, गैस और कैलोरी की अधिकता हो सकती है। दाँतों में चिपकने के कारण खाने के बाद कुल्ला कीजिए। सल्फर से संवेदनशील लोग बिना सल्फर वाली किशमिश चुनें।

किशमिश कितने समय तक ताज़ा रहती है?

सही भंडारण में किशमिश हवाबंद डिब्बे में ठंडी, सूखी जगह पर 6 से 12 महीने तक अच्छी रहती है, और फ्रिज में उससे भी अधिक। गर्मी और नमी में किशमिश कड़ी हो सकती है, चीनी की परत जम सकती है या कीड़े लग सकते हैं। चीनी जमना हानिकारक नहीं, पर कड़ी होने पर थोड़ी देर पानी में भिगोकर नरम की जा सकती है। खट्टी गंध या फफूँद लगे तो न खाइए। खरीदते समय निर्माण तिथि देखिए।

निष्कर्ष

किशमिश के प्रकार रंग, आकार और सुखाने की विधि से अलग होते हैं। दलिए के लिए काली, खीर के लिए सुनहरी, और भिगोने के लिए मुनक्का चुनिए, और हमेशा ताज़ी और सही भंडारित किशमिश लीजिए।

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About the author
Ishita Banerjee

Ishita Banerjee is a Bengali home chef who writes about mishti, payesh and festive sweets made with pistachios, raisins and cashews, including lighter versions for people watching their sugar. Based in Kolkata, Ishita writes for the Meva Sagar journal.

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