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Nutrition & Benefits

आलूबुखारा के फायदे: सूखा आलूबुखारा (प्रून), कब्ज़, हड्डियाँ और सही मात्रा

आलूबुखारा के फायदे, सूखे प्रून का पोषण, कब्ज़ और हड्डियों में भूमिका, रोज़ की मात्रा और सावधानियाँ।

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आलूबुखारा के फायदे | Meva Sagar Journal

आलूबुखारा गर्मियों का रसीला फल है, और जब इसे सुखा लिया जाता है तो इसे अंग्रेज़ी में प्रून कहते हैं। भारत में सूखा आलूबुखारा, जिसे अलूबुखारा या सूखे प्लम भी कहा जाता है, खट्टी-मीठी चटनी और पाचक चूर्ण से लेकर ड्राई फ्रूट मिक्स तक इस्तेमाल होता है। आलूबुखारा के फायदे पर काफ़ी वैज्ञानिक अध्ययन हुए हैं, खासकर कब्ज़ और हड्डियों के स्वास्थ्य को लेकर। इस लेख में हम सूखे आलूबुखारे का पोषण, पाचन और हड्डियों में इसकी भूमिका, रोज़ की मात्रा, इसे खाने के तरीके, किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए और अच्छा प्रून कैसे चुनें, ये सब बताएँगे। यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है, उपचार के लिए नहीं।

संक्षिप्त उत्तर: रोज़ 3 से 5 सूखे आलूबुखारे (प्रून) कब्ज़ में सहायक हो सकते हैं और हड्डियों के स्वास्थ्य पर भी अध्ययन हुए हैं। इनमें फाइबर, सॉर्बिटॉल, पोटैशियम और विटामिन K होता है। ज़्यादा खाने से दस्त, गैस हो सकती है। डायबिटीज़, किडनी रोग या खून पतला करने की दवा में डॉक्टर से सलाह लें।

100 ग्राम में फाइबर: सूखा अंजीर 9.8 ग्राम, प्रून 7.1, खुबानी 7.3, खजूर 6.7, किशमिश 3.7
प्रून फाइबर और सॉर्बिटॉल के कारण कब्ज़ के लिए सबसे ज़्यादा अध्ययन किए गए सूखे फलों में है।

सूखे आलूबुखारे का पोषण

सौ ग्राम सूखे आलूबुखारे में लगभग 240 कैलोरी, 64 ग्राम कार्बोहाइड्रेट (जिसमें लगभग 38 ग्राम प्राकृतिक चीनी), 7 ग्राम फाइबर और 2.2 ग्राम प्रोटीन होता है। इसमें पोटैशियम (लगभग 730 मिलीग्राम), विटामिन K, बोरॉन, तांबा और पॉलीफेनॉल जैसे एंटीऑक्सीडेंट भी हैं। सटीक आँकड़ों के लिए USDA FoodData Central देखें।

तत्व4 प्रून (लगभग 40 ग्राम)लाभ
कैलोरीलगभग 95 kcalऊर्जा
फाइबरलगभग 2.8 ग्रामपाचन
पोटैशियमलगभग 290 मिलीग्रामरक्तचाप संतुलन
विटामिन Kअच्छी मात्रारक्त के थक्के और हड्डियाँ
सॉर्बिटॉलप्राकृतिक शर्करा अल्कोहलआँतों में पानी खींचकर मल नरम करता है

आलूबुखारे के संभावित फायदे

कब्ज़ में राहत

प्रून पर हुए कई अध्ययनों में पाया गया कि रोज़ लगभग 50 ग्राम (5 से 6 प्रून) खाने से कब्ज़ वाले लोगों में मल त्यागने की नियमितता बेहतर हुई। इसका कारण फाइबर और सॉर्बिटॉल है। यह एक आहार उपाय है, दवा नहीं; पर्याप्त पानी और व्यायाम भी ज़रूरी हैं। देखें कब्ज़ में अंजीर, प्रून और किशमिश।

हड्डियों का स्वास्थ्य

कुछ अध्ययनों, खासकर रजोनिवृत्त महिलाओं में, रोज़ 50 से 100 ग्राम प्रून खाने से हड्डियों के घनत्व में गिरावट धीमी होने के संकेत मिले। यह प्रारंभिक प्रमाण है और ऑस्टियोपोरोसिस का इलाज नहीं। कैल्शियम और विटामिन D की पर्याप्त मात्रा सबसे ज़रूरी है; देखें कैल्शियम और ड्राई फ्रूट्स की सच्चाई।

दिल और रक्तचाप

पोटैशियम और फाइबर रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के प्रबंधन में सहायक हो सकते हैं। यह सहायक आहार है, दवा का विकल्प नहीं।

कैसे खाएँ और कितनी मात्रा

अधिकतर वयस्कों के लिए रोज़ 3 से 5 प्रून पर्याप्त हैं। कब्ज़ में कुछ लोग शुरुआत में 4 से 6 प्रून लेते हैं। इन्हें रात भर भिगोकर सुबह खाना, दही या ओट्स में काटकर डालना, या स्मूदी में मिलाना अच्छे तरीके हैं। बच्चों को 1 से 2 प्रून, टुकड़ों में दें। ज़्यादा खाने पर गैस और दस्त संभव हैं, इसलिए मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएँ। प्रून और रोज़ की मात्रा पर पूरा लेख पढ़ें।

खट्टी-मीठी चटनी भी बनाई जा सकती है: खजूर-इमली चटनी की तरह सूखे आलूबुखारे को भिगोकर पकाएँ।

सावधानियाँ

  • डायबिटीज़ वाले लोग मात्रा सीमित रखें और डॉक्टर से पूछें; प्रून में चीनी अधिक होती है।
  • किडनी रोगियों को पोटैशियम के कारण चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
  • वारफ़रिन जैसी दवा लेने वालों को विटामिन K के कारण पूछ लेना चाहिए।
  • आईबीएस जैसी पाचन समस्याओं में सॉर्बिटॉल गैस और दर्द बढ़ा सकता है।
  • ज़्यादा मात्रा से दस्त हो सकते हैं।

अच्छा आलूबुखारा कैसे चुनें और रखें

नरम, गहरे बैंगनी-काले, चमकदार और साफ़ आलूबुखारे चुनें। बहुत सख़्त, फफूंद वाले या खट्टी गंध वाले आलूबुखारे न लें। बाज़ार में सूखे आलूबुखारे और गुठली रहित प्रून दोनों मिलते हैं। हवाबंद डिब्बे में ठंडी जगह रखें; देखें सूखी खुबानी और प्रून कैसे चुनें और सूखे फल कैसे स्टोर करें। पैक पर FSSAI नंबर देखने के लिए FSSAI वेबसाइट उपयोगी है।

प्रून को रोज़मर्रा में कैसे शामिल करें

प्रून को सुबह ओट्स या दलिए में काटकर डाला जा सकता है, दही के साथ खाया जा सकता है या स्मूदी में मिलाया जा सकता है। मिठाई की जगह दो प्रून और कुछ बादाम एक अच्छा स्नैक है। यदि आप पहली बार प्रून खा रहे हैं तो दो दाने से शुरुआत करें और कुछ दिनों में बढ़ाएँ ताकि पेट अभ्यस्त हो जाए। पर्याप्त पानी पीना न भूलें, क्योंकि फाइबर तभी ठीक काम करता है जब शरीर में तरल पर्याप्त हो।

प्रून और आलूबुखारा

गुठली रहित प्रून और सूखे आलूबुखारे मेवा सागर पर।

प्रून देखें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रोज़ कितने आलूबुखारे (प्रून) खाने चाहिए?

अधिकतर वयस्कों के लिए रोज़ 3 से 5 प्रून, यानी लगभग 30 से 50 ग्राम, पर्याप्त हैं। कब्ज़ की स्थिति में कुछ लोग 5 से 6 प्रून तक लेते हैं, पर शुरुआत कम मात्रा से करें। ज़्यादा खाने से पेट में गैस, मरोड़ या दस्त हो सकते हैं। प्रून के साथ भरपूर पानी पिएँ और मात्रा को धीरे-धीरे बढ़ाएँ। यदि आप डायबिटीज़ में हैं तो डॉक्टर से पूछकर मात्रा तय करें।

क्या आलूबुखारा कब्ज़ में सच में फायदा करता है?

हाँ, प्रून पर कई अध्ययन हुए हैं जिनमें रोज़ 5 से 6 प्रून खाने से कब्ज़ वाले लोगों में मल त्याग बेहतर हुआ। प्रून में फाइबर के साथ सॉर्बिटॉल होता है, जो आँतों में पानी खींचकर मल को नरम बनाता है। फिर भी यह केवल आहार का उपाय है। यदि कब्ज़ लंबे समय तक रहे, दर्द, वज़न घटने या मल में खून जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर से तुरंत मिलें।

क्या आलूबुखारा हड्डियों के लिए अच्छा है?

कुछ शुरुआती अध्ययनों में, विशेषकर रजोनिवृत्त महिलाओं में, प्रून के नियमित सेवन से हड्डियों के घनत्व में गिरावट कम देखी गई। प्रून में विटामिन K, पोटैशियम और बोरॉन जैसे तत्व होते हैं जो हड्डियों के लिए सहायक माने जाते हैं। लेकिन यह दवा या कैल्शियम और विटामिन D का विकल्प नहीं है। हड्डियों की सेहत के लिए संतुलित आहार, धूप, व्यायाम और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है।

क्या डायबिटीज़ में आलूबुखारा खा सकते हैं?

सूखे आलूबुखारे में प्राकृतिक चीनी केंद्रित होती है, पर इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम माना जाता है और फाइबर भी अच्छा है। इसलिए कई मधुमेह रोगी 2 से 3 प्रून को नट्स के साथ सीमित मात्रा में खा सकते हैं। फिर भी हर मरीज़ की स्थिति और दवा अलग होती है, इसलिए अपने डॉक्टर या डायटीशियन से पूछकर और शुगर की निगरानी करते हुए ही इसे शामिल करें। मीठे प्रून उत्पादों से बचें।

आलूबुखारा और प्रून में क्या फर्क है?

आलूबुखारा आम बोलचाल में प्लम फल के लिए इस्तेमाल होता है, जबकि सूखे हुए रूप को अंग्रेज़ी में प्रून कहा जाता है। भारत में सूखे आलूबुखारे को भी लोग अलूबुखारा ही कहते हैं। पोषण के लिहाज़ से ताज़ा फल में पानी अधिक और कैलोरी कम होती है, जबकि सूखे रूप में फाइबर, शर्करा और खनिज केंद्रित हो जाते हैं। इसलिए सूखे फल की मात्रा ताज़े फल से बहुत कम रखनी चाहिए।

क्या बच्चों को प्रून दे सकते हैं?

हाँ, एक साल से ऊपर के बच्चों को नरम भिगोए हुए प्रून छोटे टुकड़ों में या प्यूरी बनाकर दिए जा सकते हैं, खासकर जब उन्हें कब्ज़ की शिकायत हो। रोज़ 1 से 2 प्रून पर्याप्त हैं। साबुत प्रून चिपचिपा होता है और गले में अटक सकता है, इसलिए इसे काटकर दें। यदि बच्चे को बार-बार कब्ज़ हो रही है तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें और केवल घरेलू उपाय पर निर्भर न रहें।

निष्कर्ष

आलूबुखारा के फायदे कब्ज़ और हड्डियों के अध्ययनों में सबसे ज़्यादा दिखे हैं, पर यह सहायक आहार है, इलाज नहीं। रोज़ 3 से 5 प्रून, भरपूर पानी और संतुलित आहार के साथ लीजिए, और किसी रोग में डॉक्टर की सलाह मानिए। संतुलित आहार पर अधिक जानकारी: WHO स्वस्थ आहार पेज।

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About the author
Siddharth Joshi

Siddharth Joshi is a former supply-chain analyst who now explains how dry fruits travel from farm to doorstep. His articles cover import grades, packaging and why prices move during the year. Based in Pune, Siddharth writes for the Meva Sagar journal.

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